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"चलिए मराठी सीखें – मिरा-भाईंदर की एकता के लिए" : मंत्री प्रताप सरनाईक

  • Jul 6, 2025
  • 1 min read

मिरा-भाईंदर: बीते कुछ दिनों से मिरा-भाईंदर में चल रहे हिंदी–मराठी विवाद पर महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री मा. प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट और संतुलित भूमिका रखते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। उन्होंने कहा,"मिरा-भाईंदर में किसी भी तरह का भाषावाद नहीं चाहिए। हम यहां विकास करने आए हैं, फूट डालने नहीं।"


इसी सोच के साथ, प्रताप सरनाईक ने एक "मराठी स्नेह उपक्रम" शुरू करने की घोषणा की है, जिसके अंतर्गत शिवसेना की प्रत्येक शाखा में मराठी बाराखड़ी की पुस्तकें रखी जाएंगी और अमराठी नागरिकों के लिए मराठी भाषा सीखने की निःशुल्क व्यवस्था की जाएगी। यह भाषा सिखाने की पहल बिना किसी ज़बरदस्ती के, प्रेमपूर्वक और आत्मीयता से की जाएगी।


मंत्री प्रताप सरनाईक ने आगे कहा –"मैं लगातार चार बार मिरा-भाईंदर से बतौर मराठी विधायक निर्वाचित हुआ हूं। यहां रहने वाले सभी भाषाओं के नागरिकों ने मुझे वोट दिया है। इसलिए मेरे लिए हर भाषा का सम्मान ज़रूरी है। लेकिन महाराष्ट्र में रहना है तो मराठी आनी चाहिए – यह ज़बरदस्ती नहीं, आत्मीयता से सिखाई जाएगी।"


उन्होंने यह भी बताया कि मिरा-भाईंदर हमेशा से एक शांतिप्रिय शहर रहा है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। यहाँ के मंगळागौर, गणेशोत्सव, दहीहंडी जैसे पारंपरिक मराठी त्योहार भी अमराठी भाई-बहन उतनी ही श्रद्धा और उल्लास से मनाते हैं।


अंत में मंत्री सरनाईक ने अमराठी नागरिकों से अपील करते हुए कहा –

"शिवसेना के माध्यम से हम 'मराठी स्नेह उपक्रम' की शुरुआत कर रहे हैं। अमराठी भाइयों से आग्रह है कि वे शिवसेना शाखाओं में आएं और प्रेमपूर्वक मराठी सीखें। हम दीवारें नहीं, भाषा का पुल बनाएंगे!"



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